केंद्रीय मंत्रिमंडल ने एकीकृत परिवहन और लॉजिस्टिक्स प्राधिकरण बनाने को मंजूरी दी है। इसे विशेष प्रयोजन संस्था के रूप में स्थापित किया जाएगा। सरकारी विज्ञप्ति के अनुसार, प्राधिकरण का काम अनुसंधान, योजना, परियोजनाओं का मूल्यांकन, निगरानी और उनके प्रभाव का अध्ययन करना होगा।
संस्था कम से कम दस साल की अवधि को ध्यान में रखकर राष्ट्रीय परिवहन मास्टर प्लान तैयार करेगी। सड़क, रेल, विमानन, जलमार्ग, बंदरगाह, शहरी परिवहन और माल ढुलाई इसके दायरे में आएँगे। पाँच साल की और वार्षिक योजनाओं को इस व्यापक ढाँचे से जोड़ने का प्रस्ताव है।
500 करोड़ रुपये या उससे अधिक की केंद्रीय बुनियादी ढाँचा परियोजनाओं के तकनीकी मूल्यांकन की जिम्मेदारी भी प्राधिकरण को मिलेगी। वित्तीय मूल्यांकन की मौजूदा व्यवस्था जारी रहेगी। सरकार का कहना है कि साझा नियोजन से विभिन्न मंत्रालयों के बीच बिखरी योजना प्रक्रिया में समन्वय बढ़ेगा।
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