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भारत · समाज, विज्ञान और विकास9 अक्टूबर 2026हमारे बारे में
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नालंदा विश्वविद्यालय पारंपरिक ज्ञान के संरक्षण पर करेगा सहयोग

सीएसआईआर के साथ समझौते में शोध, प्रशिक्षण और समुदायों के अधिकारों पर ध्यान दिया गया है।

संपादकीय चित्रांकन; यह घटना की तस्वीर नहीं है।

नालंदा विश्वविद्यालय और सीएसआईआर की पारंपरिक ज्ञान डिजिटल लाइब्रेरी इकाई ने सहयोग का समझौता किया है। विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग के अनुसार, इसके जरिए पारंपरिक ज्ञान, बौद्धिक संपदा और सांस्कृतिक विरासत से जुड़े अध्ययन को आगे बढ़ाया जाएगा। बिहार की पारंपरिक सांस्कृतिक अभिव्यक्तियाँ भी काम के दायरे में होंगी।

सहयोग में शोध परियोजनाएँ, प्रशिक्षण, विद्यार्थियों के लिए इंटर्नशिप और विशेषज्ञों का आदान-प्रदान शामिल हैं। स्थानीय पारिस्थितिकी संबंधी समझ, लोककथाओं और संगीत जैसे विषयों के दस्तावेजीकरण पर काम किया जा सकता है। संस्थानों के बीच विशेषज्ञता साझा करना समझौते का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

घोषणा में ज्ञान रखने वाले समुदायों के अधिकारों की सुरक्षा पर जोर दिया गया है। इससे अध्ययन का दायरा केवल सामग्री जुटाने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि उसके उपयोग और संरक्षण से जुड़े प्रश्नों को समझने का भी प्रयास होगा।

मूल स्रोतपत्र सूचना कार्यालय ↗

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