भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद और घाना के फसल अनुसंधान संस्थान ने कृषि शोध तथा तकनीक साझा करने के लिए समझौता किया है। कृषि मंत्रालय के अनुसार, पाँच साल के सहयोग की शुरुआत सब्जियों पर काम से होगी। इसमें टमाटर की उपयुक्त अधिक उपज वाली किस्मों और तकनीकों पर खास ध्यान रहेगा।
कार्यक्रम में कसावा, रतालू और अन्य कंद फसलों के प्रसंस्करण पर भी सहयोग प्रस्तावित है। फसल कटने के बाद नुकसान घटाने के उद्देश्य से शीत भंडारण, ठंडे परिवहन, छँटाई और ग्रेडिंग जैसी व्यवस्थाओं के लिए तकनीकी सहायता और प्रशिक्षण शामिल किए गए हैं।
दोनों पक्ष वैज्ञानिकों, प्रजनन सामग्री और शोध विधियों का आदान-प्रदान कर सकेंगे। संयुक्त कार्य समूह नई दिल्ली और अकरा में समय-समय पर प्रगति की समीक्षा करेगा। मंत्रालय ने इसे शोध को व्यावहारिक कृषि उपयोग से जोड़ने की पहल बताया है।
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