December 9, 2019
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Ayodhya Verdict: अगर सुप्रीम कोर्ट का फैसला राम मंदिर के पक्ष में ना होता तो क्या होता?

राम मंदिर बाबरी मस्जिद जो भी आप कहने उसके फैसले भी अब तक टीवी चैनलों पर 3000 घंटे की टिप्पणी हो चुकी है सरकार समेत सभी को अंदाजा था कि किस तरह का फैसला आने वाला है वैसे भी जो झगड़ा 164 वर्ष में भी कोई ना कर पाए उसका उच्चतम न्यायालय से जो भी फैसला था उसे ठीक ही होना था.

पर सोचिये अगर पांच जजों का बैच बाबरी मस्जिद की जमीन सुन्नी वक्फ बोर्ड के हवाले करके गिरी हुई मस्जिद को दोबारा बनाने के लिए एक सरकारी ट्रस्ट बनाने और निर्मोही अखाड़ा और रामलला को मंदिर के लिए अलग से 5 एकड़ जमीन प्लॉट करने का फैसला देता तो क्या होता.

क्या तब भी सब कहते कि यह एक ऐतिहासिक फैसला है जिसका पालन हर नागरिक और सरकार के लिए लाजमी है. फैसला उस दिन आया जब करतारपुर कॉरिडोर उद्घाटित हुआ हालांकि यह भी एक ऐतिहासिक पल था पर इसका सबसे ज्यादा कवरेज पाकिस्तानी चैनल्स पर हुआ जिस तरह अयोध्या फैसले का कवरेज भारती चैनल पर हुआ.

Ayodhya Verdict: राम मंदिर

उस समय कोर्ट रूम खचाखच भरा हुआ था उसी वक्त करतारपुर साहब के सीन में भी खबर से खफा चल रहा था अभी पाकिस्तानी चैनलों पर इस संदर्भ में और बात होती अगर भूतपूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ की बीमारी और इलाज के लिए उन्हें लंदन रवाना करने के मामले में आ मां की अर्चने ना  पैदा होती।

हालांकि अदालत ने नवाज शरीफ को इलाज के लिए बाहर जाने की अनुमति दे दी है मगर इस समय यह इन-तिहाई बीमार शख्स गृह मंत्रालय और नेशनल अकाउंटेबिलिटी ब्यूरो के दरमियान फुटबॉल बना हुआ है. क्योंकि जब तक नवाज शरीफ का नाम देश से बाहर जाने वालों पर पाबंदी की लिस्ट से नहीं निकलता वह जहाज पर सवार नहीं हो सकते।

 सरकार कह रही है कि उसे लिस्ट से नाम निकालने में कोई दिक्कत नहीं मगर यह भी नहीं बता पा रही कि अगर उसे दिक्कत नहीं तो फिर किसे दिक्कत है जो कोई भी टांग अड़ा रहा है उसे पता होना चाहिए कि नवाज शरीफ की जिंदगी इस वक्त एक कच्चे धागे से लटकी हुई है.

अगर शासित नवाज शरीफ के रूप में एक और जुल्फिकार अली भुट्टो पंजाब को भी तोहफे में देना चाहते हैं तो वह अलग बात है दूसरी ओर मौलाना फजलुर रहमान का राजधानी इस्लामाबाद में धरना दूसरे सप्ताह में दाखिल हो गया है अगर नवाज शरीफ को कुछ हो गया तो फिर धरने में एक नई जान पड़ सकती है और सरकार को वाकई जान के लाले पड़ सकते हैं.

फैसला जो भी आया है उससे पूरा देश संतुष्ट है. यह पोस्ट BBC NEWS के अधीन है. क्योंकि यह पोस्ट बीबीसी न्यूज़ से स्रोत के रूप में लिया गया है. इस पोस्ट से किसी भी तरह का क़ानूनी उलंघन नहीं कर रहा है.

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